नवरात्रि महोत्सव
चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में माता रानी का विशेष शृंगार, दुर्गा सप्तशती पाठ और महाआरती का आयोजन।
आस्था का पावन धाम
खुड़खुड़ा कलां की पावन धरती पर
माता रानी के धाम में आपका स्वागत है।
खुड़खुड़ा कलां, मुंडवा · नागौर, राजस्थान
दर्शन की योजना बनाएँ
दर्शन के लिए मंदिर सभी दिन खुला रहता है।
5:00 प्रातः — 9:00 रात्रि
प्रतिदिन6:00 बजे
सुबह की आरती में शामिल हों7:30 बजे
संध्या आरती एवं माता वंदनाविशेष पर्वों पर समय बदल सकता है। यात्रा से पहले समिति से पुष्टि कर लें।
हमारी आस्था, हमारी विरासत
“माता के चरणों में
श्रद्धा और समर्पण।”
राजस्थान के नागौर ज़िले के खुड़खुड़ा कलां गाँव में स्थित 'श्री कालका माता मंदिर' आस्था, चमत्कारों और सामाजिक समरसता का एक अनूठा केंद्र है। यहाँ माता रानी की एक अद्भुत और 'स्वयंभू' (स्वयं प्रकट) प्रतिमा विराजमान है, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।
माता कालका जी को यहाँ प्रेम और असीम श्रद्धा के साथ 'बेहेराली माता' के नाम से भी पूजा जाता है। लोककथाओं के अनुसार, परम भक्त बेहेरा बाबा जी माता रानी को बिलाड़ा (जोधपुर) से यहाँ लेकर आए थे। जब बेहेरा बाबा ने माता से पूछा कि "हमें कैसे पता चलेगा कि आप हमारे गाँव में ही निवास करेंगी?", तो माता ने कहा कि ज़मीन में एक सूखी लकड़ी गाड़ देना, सुबह तक वह हरी हो जाएगी। बाबा ने अपना लकड़ी का हल (खेत जोतने का औज़ार) ज़मीन में गाड़ दिया। चमत्कारिक रूप से, अगले ही दिन वह सूखा हल हरा-भरा हो गया और उसी स्थान पर माता कालका की मूर्ति स्वयं प्रकट हो गई।
तब से लेकर आज तक पूरे क्षेत्र में माता की पूजा की जाती है। मुख्य मंदिर के पास ही बेहेरा बाबा का मंदिर भी बना हुआ है, जहाँ श्रद्धालु उनका भी आशीर्वाद लेते हैं।
माता की महिमा का एक और बड़ा चमत्कार तब देखने को मिला जब कुछ सालों बाद गाँव वालों ने मंदिर का पुनर्निर्माण करवाने का निश्चय किया। उन्होंने मूर्ति को ज़मीन से थोड़ा ऊपर उठाना चाहा, लेकिन ऐसा करते ही मूर्ति में बहुत सारी दरारें आ गईं। इससे घबराकर गाँव वालों ने काम रोक दिया और मूर्ति को वैसे ही छोड़ दिया। लेकिन अगली सुबह जब गाँव वाले वापस आए, तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा—मूर्ति एकदम सही थी, दरारें गायब हो चुकी थीं और सबसे बड़ी बात, मूर्ति स्वयं ही पहले से ज्यादा ऊंचाई पर (ज़मीन से बाहर) स्थापित हो गई थी।
यह चमत्कारी धाम एकता का एक अद्भुत प्रतीक है, जहाँ सभी '36 कौम' (सभी समुदायों) के लोग बिना किसी भेदभाव के दर्शन करने आते हैं और माता के दरबार में मत्था टेकते हैं।
विशेष रूप से नवरात्रि के पावन पर्व पर यहाँ एक भव्य मेले का आयोजन होता है। पूरे नवरात्रि के दौरान मंदिर में माता के नाम की 'अखंड ज्योत' प्रज्वलित रहती है। इन पवित्र दिनों में मंदिर प्रांगण में विशेष श्रृंगार, पाठ और आरती होती है, जिससे पूरा वातावरण दिव्य और भक्तिमय हो जाता है।
मंदिर तक पहुँचने की जानकारीदिन की शुभ शुरुआत
नागौर, राजस्थान · भारतीय समय
आज की तारीख़
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सूर्योदय के समय का दैनिक पंचांग। बदलाव का समय भारतीय समय में है।
स्रोत: Horoscopes Today पंचांग APIभक्ति के रंग, उत्सव के संग
माता की आराधना में
सभी श्रद्धालुओं का स्वागत है।
चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि में माता रानी का विशेष शृंगार, दुर्गा सप्तशती पाठ और महाआरती का आयोजन।
पूर्णिमा एवं विशेष तिथियों पर श्रद्धालुओं के लिए मंदिर समिति की ओर से भंडारे और प्रसादी का आयोजन।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए
दूर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला में ठहरने की व्यवस्था।
परिसर में शुद्ध और ठंडे पेयजल की व्यवस्था।
विशेष पर्वों पर प्रसादी और भंडारे की व्यवस्था।
श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा।
ठहरने और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता यात्रा से पहले पता कर लें।
माता के दरबार की झलकियाँ
दर्शन, विशेष शृंगार और मंदिर के आयोजनों की तस्वीरें यहाँ देखें।
आधिकारिक दान विवरण के लिए मंदिर समिति से संपर्क करें।
+91 88906 24926 पर बात करेंसहयोग की राशि और रसीद की जानकारी समिति से प्राप्त करें।सेवा का लेखा
मंदिर में प्राप्त दान का तारीख़वार विवरण।
| तारीख़ | दानदाता | राशि | रसीद संख्या | माध्यम | टिप्पणी |
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अभी दान का विवरण उपलब्ध नहीं है।
पधारें माता के धाम
गाँव — खुड़खुड़ा कलां
पोस्ट — झूझंडा, तहसील — मुंडवा
ज़िला — नागौर, राजस्थान — 341026
सटीक रास्ते के लिए मंदिर समिति से मार्गदर्शन लें।
यात्रा से पहले
मंदिर प्रतिदिन प्रातः 5:00 से रात्रि 9:00 बजे तक खुला रहता है। पर्वों पर समय बदल सकता है।
प्रातः आरती 6:00 बजे और संध्या आरती 7:30 बजे होती है। विशेष आयोजनों का समय समिति से पता करें।
धर्मशाला में ठहरने की सुविधा दी गई है। कमरों की उपलब्धता और व्यवस्था के लिए आने से पहले समिति से संपर्क करें।
विशेष शृंगार, पाठ, महाआरती और प्रसादी की तिथियों व समय की पुष्टि मंदिर समिति से करें।
गौसेवा में सहभागिता
मंदिर द्वारा संचालित: यह गौशाला समस्त मंदिर द्वारा संचालित की जाती है, जिसमें खुड़खुड़ा कलां सहित खुड़खुड़ा के तीनों गाँवों का पूरा सहयोग मिलता है। दान का उपयोग: मंदिर में आने वाले दान का उपयोग मंदिर के कार्यों के साथ-साथ गौशाला में पल रही गौ-माताओं के चारे और देखभाल के लिए भी किया जाता है। गौ-सेवा: श्रद्धालु माता के दर्शनों के साथ-साथ यहाँ गौ-सेवा करके पुण्य भी प्राप्त कर सकते हैं।
दान देने के लिए सम्पर्क करेंमंदिर की सेवा में समर्पित
मंदिर समिति के पदाधिकारी एवं संपर्क विवरण
पदाधिकारियों के विवरण की पुष्टि होने तक मंदिर के संपर्क नंबर पर बात करें।